मेरी माँ थीं।

 

मेरी माँ थीं  बरगद की भांति  

मजबूत जड़ें, विशाल ह्रदय  

बाहें फैलाती, छाँव बांटती  

पर तूफानों में भी डटीं , झूला झुलाती  

 

मेरी माँ थीं विशाल गगन  

दुनिया भर का अपनापन  

जल से भरे मेघ सा चुम्बन  

रंगबिरंगा , इंद्रधनुषी, आलिंगन  

 

मेरी माँ थीं हिमालय  

ऊँची बहुत ऊँची , सबसे अलग  

तटस्थ , उज्जवल और सजग  

भाल पे जड़ा एक अनमोल नग 

 

मेरी माँ थीं गंगा  

जीवन लुटाती गीत सतरंगा  

आशा के दीपों कढ़ा  लहंगा  

दुर्गम रास्तों में भी मन चंगा  

 

मेरी माँ थी भोर का तारा  

सलेटी आसमान में चमकता प्यारा  

भविष्य की संभावनाओं का पिटारा  

हर भोर वो करती मुझे नभ से इशारा  

मेरी माँ थीं , और हैं।  

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