ऊंची उड़ान

रूई से उड़ते हुए नभ में बादल, कभी हाथी, कभी महल बनाते हुए और कभी कभी कितना बड़ा सा भेड़ों का झुण्ड , कितने कलाकार हैं ये बादल, इन पे चढ़ कर घूमने में आनंद ही आनंद होगा, यही सोचती थी मैं जब छोटी थी , यही सोचती हूँ मैं आज भी….

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सवाल और ज़िन्दगी

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आशा शक्ति