विचार विस्तार

विचार कितने संकुचित और देश की सीमाओं के विस्तार की लगातार कोशिश करता रहता है ये आदमी कितना नासमझ है सच में अंतर मन कितना सिकुड़ा कितना सिमटा और जमीन और ज़्यादा और ज़्यादा और ज़्यादा

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