साँसे

ये सांसें आती हैं जाती हैं

जाती हैं फिर आती हैं

चलती रहती हैं क्यूंकी

प्रमाण हैं वो मुझमे जीवन सा

मेरे जीवन उद्देश्य लेखन सा

मेरे लाख के टूटे कंगन सा

मेरे प्रश्नों के  फैले आँगन सा

मेरे नटखट, अटपट बचपन सा

मेरे बिछड़े मित्रों के क्रंदन सा

मेरी ममता के आलिंगन सा

मेरी रुकती चलती धड़कन सा

मेरे कान की चांदी लटकन सा

मेरे हृदय की पीड़ा पावन सा

मुझ पे झूठे मैले लांछन सा

मेरे आँसू में बहते अंजन सा

मेरे शिव कान्हा के पूजन सा

मेरे भाल  की कुमकुम कंचन सा

मेरे संबंधों में भटकन सा

मेरी कल्पनाओं के मंथन सा

मेरे बंधन चेतन कुंदन सा

मेरे मंगल सूत्र के चुंबन सा

मेरी मर्यादाओं के ईंधन सा

मेरे फटे वस्त्रों में सीवन सा

प्रमाण हैं वो मुझमे जीवन सा

मेरे जीवन उद्देश्य लेखन सा

ये सांसें आती हैं जाती हैं

जाती हैं फिर आती हैं क्यूंकी प्रमाण हैं वो......

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