आओ गणपति बातें करेंगे
आओ गणपति बैठो, मिल कर बातें करेंगे
घरों में पंडालों में मुलाकातें करेंगे।
तुम आए हो तो नई शुरुआत होगी
तुम होंगे राजा और हमारी बारात होगी
भूलेंगे सब बीती कठिनाइयों को
विघनहर्ता संभालों हम अनुयायियों को
तुम तो प्रथम हो, शुभम हो, सरल हो
तुम कई युग हो और तुम आज कल हो
जिसने माता पिता की परिक्रमा में ढूंढा
विश्व का भ्रमण , तुम तो वो योगफल हो
एकदंत हो, तो है, उसका भी कारण
दिया था बलिदान, किया था निवारण
लिखी थी कथा , थी वेदव्यास की वाणी
‘बुद्धिप्रिय’, तुमने की अलंकृत ‘महाभारत’ कहानी
तुम ओंकार-स्वरूप, त्रिमूर्ति, तीन लोक हो
रक्तचंदन, दूर्वा , मूषक, मोदक हो
कितने अद्भुत और लोकप्रिय हो तुम
मेरी कविताओं में पूजनीय हो तुम
आओ साथ कुछ दिन, कुछ रातें करेंगे
आओ गणपति बैठो मिल कर बातें करेंगे
घरों में पंडालों में मुलाकातें करेंगे।