प्यार की बारिश !

क्या कभी सुना है किसी ने

कि प्यार की भी बारिश होती है

और जाने कितनों को

उसकी बहुत गुजारिश होती है

जब होती है प्यार की बारिश यहाँ वहाँ

खिल उठते हैं तन और मन कहाँ कहाँ

पर ये जगह चुन कर ही क्यूँ बरसती है?

कहीं बहुत महंगी कहीं पर सस्ती है

कहीं पर बहुत ज्यादा कहीं तनिक भी नहीं

कहीं जीवन भर तो कहीं क्षणिक भी नहीं

ना इसका मौसम है, ना महीना, और ना ही समय

भरी रहती है ये तो प्रत्येक मानव हृदय

क्यूँ नहीं बरसती है फिर ये वहाँ

जहां घृणा की खेती है

द्वेष है, क्रोध है, हिंसा की उत्पत्ति है

प्यार की बारिशों से जो उगेंगी फसलें

सुलझा जाएंगी वो बड़े बड़े मसले

क्या कभी सुना है किसी ने

कि प्यार की भी बारिश होती है

और जाने कितनों को  

उसकी बहुत गुजारिश होती है

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