कलाकार !
कृष्ण का नाम आया तो प्रेम बोध से लेकर जीवन मंत्र तक का स्मरण हो जाता है, किन्तु कान्हा नाम सुनते ही बरबस कृष्ण का बालपन मन में समा जाता है , जितने नाम हैं ना कृष्ण के उतने ही रूप हैं इस अद्भुत व्यक्तित्व के, भगवान् मानूं , मित्र मानूं या कि एक नटखट बालक , जितने नाम , उतनी ही लीलाएं!