कृष्ण जन्म  

 

जब किसी झोपड़े में सोया हुआ हो बच्चा  

अन्धकार में लिपटा पर हो ललाट दमका  

के मुख पर पड़ती हो सूर्य की पहली किरण  

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म  

 

जीवन को है गुदगुदाता , आशाओं को बंधाता  

नवीन प्रातःकाल के कमल सा जगमगाता  

माता के आँचल में ही नन्हा ढूंढ लेता हो गगन  

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म  

 

कीचड़ में खेलते और किलकारियां भरते  

धूप और वर्षा की चिंता ना करते  

कच्चे - पक्के फलों में बच्चे पा लेते मक्खन  

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म  

 

 चिढ़ते , चिढ़ाते ,रूठते , मनाते  

शुरू हो जातीं जब ना ख़त्म होने वाली बातें  

पतझड़ में भी ढूंढ लेते मित्र पावन सा सावन  

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म  

 

पर्वतों की श्रृंखलाओं को गले से लगाती  

नदिया मतवाली जब चाँद को चिढ़ाती  

धरती बना लेती जब सूरज का कंगन  

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म  

 

बांसुरी की सुरीली तानों से भीगी  

मन बाँवरे में प्रेम की भावनाएं सतरंगी  

तबले की थाप सा हो ह्रदय में स्पंदन  

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म  

 

जब समय हो कठिन और साथ ना हो परिजन  

दुविधाओं और शंकाओं से व्यथित हो ये मन  

कोई मिले लेप चन्दन जैसे पिता का आलिंगन  

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म  

 

जब हर ओर हो हिंसा और अपराधों का ताँता  

विलास का  प्रदर्शन और स्वार्थ सबको भाता  

अधर्म पर धर्म की विजय का हो आश्वासन  

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म  

 

युद्ध क्षेत्र में बजे जब योद्धाओं का शंख  

राष्ट्र की सुरक्षा और विजय का हो लक्ष्य  

हर सैनिक के पास हो शक्तिशाली सुदर्शन  

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म  

 

कोई नायक जब समक्ष हो लिए दूरदर्शिता  

बहा दे जन मानस में संभावनाओं की सरिता  

समस्त पृथ्वी हो गदगद कुछ ऐसा हो प्रयोजन   

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म  

 

कर्म कर , बस कर्म कर कुछ ऐसी हो प्रेरणा  

कर्त्तव्य पथ पर अग्रसर होने की जब चेतना  

गीता के श्लोकों में मिले संसार का सब मूलधन  

तब होता है मेरे लिए कृष्ण जन्म

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