चंदा मामा दूर के
चंदा की लालसा होती है अलग अलग
अंतरिक्ष प्रयोगशाला से मैया की लोरी तक
चंदा चमकता है , पूरा भी आधा भी
सबको वो भाता है थोड़ा भी ज़्यादा भी
चंदा से मिलने की चंदा को लेने की
चंदा की बातें हैं खुली आँख सपने सी
दीखता है रातों में चांदी की थाली सा
प्रेमिका की बाली सा , नन्हे की ताली सा
चंदा संग नाचे भी, चंदा संग घूमे भी
नानी की कहानी में चंदा संग झूमे भी
चंदा संग प्रीत का युग युग का किस्सा है
धरती पर चन्दा तो घर घर का हिस्सा है
अंतरिक्ष का चन्दा तो मानव का खिलौना है
है दूर बहुत इठलाता एक यही रोना है
टहल आया है चंदा पर मानव करामाती
नाप आया है कदमों से चन्दा मामा की छाती
मेरे लिए कहानी सा कविता सा चंदा है
आसमानों में भटका अद्भुत सा बन्दा है
उपग्रह है धरती का वैज्ञानिक कहते हैं
अंतरिक्ष की दौड़ है, सभी लगे रहते हैं
उनका प्रयास भी अपने में ख़ास है
मुझे भी चंदा तक सवारी की आस है
विक्रम जब पहुंचेगा , प्रज्ञान करेगा चहलकदमी
पुए पकाऊंगी गोल चन्दा से, चाँदी सी होगी चाशनी।