खुशी का प्रश्न।
सुना है मनुष्यों ने खुशहाली को भी सूचीबद्ध किया है
कौन कहाँ , कैसे और कितना खुश है इसको सिद्ध किया है
प्रमाण के तौर पर कई मानदंडों को प्रस्तुत किया है
और लोगों ,ना जाने कैसे ये कार्य अद्भुत किया है ?
सोचती हूँ क्या प्रश्न पूछे होंगे ‘ख़ुशी' को सिद्ध करने को ?
और फिर उस राष्ट्र की ख़ुशी को सूचीबद्ध करने को?
सरकारी नीतियों, शिक्षा, चिकित्सा आदि की बातें हुई होंगी
रोज़गार , पर्यावरण आदि से भी मुलाकातें हुई होंगी
पर यही क्या काफी है खुशहाली का स्तर तय करने को?
या कि मात्र है ये मानदंडों की प्रश्न तालिका भरने को?
क्या ये मान दंड हर प्रकार की ख़ुशी माप पाते हैं?
इस जटिल मानव के मन का हर एक पहलू भांप पाते हैं ?
क्या वो टोह पाते हैं थोड़ा मिलने से भी ज़्यादा सी ख़ुशी?
करोड़ों दिलों में पनपती नेक इरादा सी ख़ुशी?
सरकारी नीतियों में एक नवीन चेतना सी ख़ुशी?
जनता के जुझारूपन और संवेदना की ख़ुशी ?
क्या माप लेते हैं वो भाग्य और सिद्धि एक संतान की आँखों में?
खिलखिलाती सी ज़िन्दगी रंगों और पटाखों में?
नल में पानी, सड़क पे बिजली, प्रदूषणरहित चूल्हे की ख़ुशी
हर गाँव में , हर जन के बैंकों में खाते खुले की ख़ुशी?
प्रश्न तालिकाएं तो असमानता ही दिखा पाती हैं
भेद भाव और विषमताएं ही दिखा पाती हैं
विकसित देशों के गिने चुने अनुभव ही जुटा पाती हैं
राष्ट्र की ख़ुशी को कहाँ ठीक से वो बता पाती हैं ?
नहीं समझ पाती हैं वो छोटे छोटे प्रयासों की खुशी
नयी परियोजनाओं और शिलान्यासों की ख़ुशी
नहीं देख पाती हैं उज्जवल भविष्य की आशाओं की ख़ुशी
विकसित, प्रचलित, अनगिनत भाषाओँ की ख़ुशी
ख़ुशी को सूचीबद्ध करना काम ही कठिन है बहुत
ख़ुशी को निहित करने में ही प्रश्न चिन्ह हैं बहुत।
सुना है मनुष्यों ने खुशहाली को भी सूचीबद्ध किया है
कौन कहाँ , कैसे और कितना खुश है इसको सिद्ध किया है
प्रमाण के तौर पर कई मानदंडों को प्रस्तुत किया है
और लोगों ,ना जाने कैसे ये कार्य अद्भुत किया है ?